ओडिशा के छह बाढ़ प्रभावित जिलों के 74 ब्लॉकों के 1,381 गांवों में 9.40 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि अब तक 3.70 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बाढ़ प्रभावित जिलों में भद्रक, जाजपुर, बालेश्वर, मयूरभंज, केंदुझर और केंद्रापड़ा शामिल हैं। बाढ़ की स्थिति बिगड़ने के बीच राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में 550 राहत शिविर खोले गए हैं, जहां बाढ़ के कारण विस्थापित लोगों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। राहत एवं बचाव कार्यों और आपातकालीन प्रतिक्रिया को मजबूत करने के लिए छह जिलों में 45 ओड्राफ (ODRAF) टीमें, 8 एनडीआरएफ (NDRF) टीमें और अग्निशमन सेवा की 65 टीमें तैनात की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही राहत और सहायता से संतुष्ट हैं। उन्होंने दोहराया कि आपदा की स्थिति में उनकी सरकार लोगों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।
माझी ने संवाददाताओं से कहा कि हम लोगों की सरकार हैं। चाहे कैसी भी आपदा आए, हम लोगों के सुख-दुख में उनके साथ हैं और आगे भी साथ रहेंगे।
बाढ़ की स्थिति के कारणों के बारे में मुख्यमंत्री ने बताया कि जून, जुलाई और अगस्त के तीन महीनों के दौरान हुई बारिश असामान्य रूप से अधिक रही है। इस अवधि में 1,100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 34 प्रतिशत अधिक है।
माझी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में राज्य में इस तरह का असामान्य बारिश का पैटर्न देखने को नहीं मिला है।
मुख्यमंत्री ने सोमवार को जाजपुर और भद्रक जिलों का दौरा कर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया और मौके पर राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति का आकलन किया था।
दौरे के दौरान माझी सड़क मार्ग से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और कई स्थानों का नाव एवं पैदल निरीक्षण किया। उन्होंने जाजपुर के दशरथपुर ब्लॉक की कसपा और तारापदा पंचायतों के अंतर्गत आने वाले गांवों तथा भद्रक के तिहिड़ी ब्लॉक की श्यामसुंदरपुर पंचायत के गांवों में स्थानीय लोगों से बातचीत की।
उन्होंने जारी राहत एवं बचाव कार्यों की भी समीक्षा की और जाजपुर के रामचंद्रपुर स्कूल में तैयार किए जा रहे पके भोजन की गुणवत्ता का निरीक्षण किया।
भद्रक में मुख्यमंत्री ने दपानाकानी स्कूल में बनाए गए राहत शिविर का दौरा किया और विस्थापित लोगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याओं, खासकर राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक सहायता प्राप्त करने में आ रही दिक्कतों के बारे में जानकारी ली।