राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कटक में जगद्गुरु कृपालु विश्वविद्यालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को नैतिक मूल्यों से युक्त नागरिक तैयार करने के साथ ज्ञान, नवाचार और अनुसंधान के केंद्र के रूप में विकसित होना चाहिए, ताकि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।
राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा सदियों से ज्ञान, संस्कृति, आध्यात्म और सेवा की भूमि रहा है तथा महाप्रभु जगन्नाथ की पवित्र धरती ने हमेशा समावेशिता, करुणा और मानव कल्याण का संदेश दिया है।
उन्होंने कटक की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मधुसूदन दास, गौरी शंकर राय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और बीजू पटनायक जैसी महान विभूतियों की जन्मस्थली है। वहीं गोपबंधु दास और हरेकृष्ण महताब ने भी कटक को अपनी कर्मभूमि बनाकर समाज और संस्कृति की सेवा की।
राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि नया विश्वविद्यालय भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ते हुए अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि युवाओं का ज्ञान तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग मानवता, समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए किया जाए।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका है और उन्हें ऐसे कुशल पेशेवर, शोधकर्ता एवं उद्यमी तैयार करने चाहिए, जो विकसित ओडिशा और विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें। इस अवसर पर राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी समेत कई गणमान्य उपस्थित थे।