ओडिशा में सेकेंडरी स्तर पर स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दर 2025-26 में घटकर 14.1 प्रतिशत हो गई है जो 2024-25 में 15 प्रतिशत थी। स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने शुक्रवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। मंत्री के अनुसार, UDISE+ के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में ड्रॉपआउट दर 2023-24 में 12.80 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में बढ़कर 15 प्रतिशत हो गई थी। हालांकि, 2025-26 में इसमें कमी दर्ज की गई।
हालांकि, राज्य सरकार के पास इस बात का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है कि 2024-25 में कक्षा 10वीं पास करने वाले कितने विद्यार्थियों ने कक्षा 11वीं में दाखिला नहीं लिया। साथ ही, इनमें से कितने विद्यार्थियों ने बाद में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, डिप्लोमा या नर्सिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया अथवा NIOS/SIOS और अन्य कार्यक्रमों से जुड़े, इसकी भी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
मंत्री गोंड विधानसभा में भवानीपटना विधायक सागर चरण दास के लिखित सवाल का जवाब दे रहे थे।
गोंड ने बताया कि ओडिशा शिक्षा सर्वेक्षण (OSS)/चाइल्ड ट्रैकिंग सर्वे के तहत चिन्हित, मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़े गए और अभी तक मुख्यधारा में शामिल नहीं किए जा सके स्कूल से बाहर बच्चों (OoSC) का जिला-वार विवरण एक अनुलग्नक में उपलब्ध कराया गया है।
ओडिशा के 30 जिलों में डुप्लीकेट, टेस्ट और अमान्य प्रविष्टियों को हटाने के बाद कुल 2,16,131 स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान की गई। इनमें से 79,996 बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा जा चुका है, जबकि 1,36,135 बच्चे अभी भी मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए हैं।
आंकड़ों से यह भी पता चला कि कमाई के लिए मजबूरी, जागरूकता की कमी और अभिभावकों की अनिच्छा बच्चों के स्कूल छोड़ने के तीन प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
ओडिशा शिक्षा सर्वेक्षण (OSS) की रिपोर्ट के अनुसार, 26,932 बच्चों के स्कूल छोड़ने का कारण कमाई की मजबूरी बताया गया। इनमें वे मामले शामिल हैं, जहां परिवार में कमाई करने वाला कोई अन्य सदस्य नहीं था।
वहीं, 23,449 मामलों में जागरूकता की कमी, जबकि 59,656 मामलों में अभिभावकों की अनिच्छा को स्कूल छोड़ने का कारण बताया गया।
विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, इन तीनों कारणों को मिलाकर राज्य में कुल 1,10,037 ड्रॉपआउट मामलों की वजह सामने आई है।