तारातला निर्माणाधीन गोदाम हादसे में गोदाम के मालिक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस हादसे में मरने वालो की संख्या बढ़कर आठ पर पहुंच गयी है। गुरुवार (25 जून) को इस मामले में पुलिस ने बताया कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया है उनमें स्ट्रक्चरल इंजीनियर समेत कुल पांच लोग शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार साथ ही इस मामले को लालबाजार की जासूसी विभाग को सौंपने के साथ ही एक एसआईटी का भी गठन किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दायर किया है और उन सभी को शामिल किया है जो तारातला में निर्माणाधीन गोदाम से जुड़े हुए थे।
मीडिया से बात करते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उन पांचों व्यक्तियों के बारे में भी जानकारी दी जिन्हें इस मामले में अभी तक गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं दूसरी तरफ इस हादसे में बचाव व राहत अभियान अभी भी जारी है।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में अयान ट्रेडर्स का सुपरवाइजर गुलजार हुसैन, लोहे की संरचना बनाने वाली कंपनी का प्रतिनिधि कमल सामंत, शंभुनाथ बेहरा - जमीन का लीज़ जिस व्यक्ति के नाम पर है, मजदूरों देने वाला और ट्राईमेक्स ठेकेदार दीवाकर भंडारी और कोलकाता नगर निगम (KMC) से गोदाम का प्लान पास करवाने के लिए दलाल की भूमिका निभाने वाला अब्दुल हामिद को गिरफ्तार किया जा चुका है। बताया जाता है कि तारातला पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में पहले 4 लोगों का नाम शामिल है।
गुरुवार (25 जून) की सुबह तारातला गोदाम हादसे के बाद मलबे के ढेर से 5 लोगों को बरामद किया गया। 24 जून (बुधवार) की दोपहर को हुए हादसे के बाद 18 घंटे से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद राहत व बचाव कार्य लगातार जारी है। बताया जाता है कि स्निफर डॉग व अत्याधुनिक यंत्रों की मदद से मलबे में फंसे लोगों को ढूंढने और उन्हें बाहर निकालने का काम किया जा रहा है।
बता दें कि कोलकाता के तारातला इलाके में P2 ट्रांसपोर्ट डीपो रोड पर बुधवार की दोपहर को करीब 12.05 बजे निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिर गयी। मलबे में कई मजदूर फंस गए थे। युद्धकालिन तत्परता के साथ राहत व बचाव कार्य को शुरू किया गया। इस हादसे में अब तक 8 लोगों के मरने की पुष्टि हो चुकी है वहीं 20 लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है। स्थानीय लोगों का दावा है कि अभी भी मलबे के नीचे 50 के करीब लोग दबे हो सकते हैं। राज्य के 6 विभागों - सेना, पुलिस, नगर निगम, SDRF, स्वास्थ्य, दमकल और परिवहन ने मिल कर राहत व बचाव कार्य को शुरू कर दिया था। बताया जाता है कि बाद में इसमें NDRF भी शामिल हुई।