भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन गुरुवार को एक दिवसीय दौरे पर ओडिशा पहुंचेंगे। इस दौरान वह महत्वाकांक्षी ‘ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन’ का शुभारंभ करेंगे और गहरे समुद्र एवं अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सतत मत्स्य पालन के लिए मछुआरों को प्राधिकरण पत्र (ऑथराइजेशन लेटर) वितरित करेंगे।
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम भुवनेश्वर स्थित ओयूएटी कृषि शिक्षा सदन में होगा। उपराष्ट्रपति मछुआरों, मत्स्य उद्यमियों, मछली पकड़ने वाले पोतों के मालिकों और मत्स्य सहकारी समितियों को औपचारिक रूप से प्राधिकरण पत्र सौंपेंगे।
नई पहल के तहत ओडिशा के मछुआरे, जो अब तक तट से 12 नॉटिकल मील (23 किमी) तक ही मछली पकड़ सकते थे, अब 200 नॉटिकल मील (370 किमी) तक गहरे समुद्र में मत्स्य पालन कर सकेंगे। अधिकृत नौकाओं को इस सीमा से आगे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी मछली पकड़ने की अनुमति मिलेगी। इससे मछुआरों की आय बढ़ने और राज्य की ब्लू इकोनॉमी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
कार्यक्रम में राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य एवं पशु संसाधन विकास मंत्री गोकुलानंद मलिक, सांसद अपराजिता सारंगी, सांसद सुकांत पाणिग्रही, विधायक प्रशांत कुमार जगदेव सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल होंगे। कार्यक्रम में करीब 1,000 मछुआरों, मत्स्य पालकों और मत्स्य उद्यमियों के भाग लेने की संभावना है।
केंद्र सरकार मत्स्य उत्पादक संगठनों (FPO) और सहकारी समितियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया के डिजिटलीकरण पर विशेष जोर दे रही है। सभी प्राधिकरण पत्र ऑनलाइन जारी किए जाएंगे।
ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026–2036) राज्य सरकार की प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य ओडिशा को गहरे समुद्र में मत्स्य पालन और समुद्री खाद्य निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाना है। इसके तहत मछुआरों को आधुनिक उपकरण, तकनीकी सहायता और बेहतर बाजार सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
ओडिशा की 575 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा है और राज्य में हर वर्ष लगभग 2.4 लाख मीट्रिक टन समुद्री मछलियों का उत्पादन होता है। लगभग 5 लाख मछुआरे अपनी आजीविका के लिए बंगाल की खाड़ी पर निर्भर हैं। पारंपरिक मत्स्य क्षेत्र से बाहर उपलब्ध टूना, बिलफिश, स्क्विड, गहरे समुद्र की झींगा समेत अन्य उच्च मूल्य वाली समुद्री प्रजातियों के दोहन से इस मिशन के जरिए समुद्री मत्स्य उत्पादन और मछुआरों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।