प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) संगठन को बड़ा झटका देते हुए 10 भूमिगत माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़ कंधमाल पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है।
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने हथियार, गोला-बारूद और अन्य सामग्री भी पुलिस के सामने जमा कराई। सभी कैडरों ने औपचारिक रूप से हिंसा का त्याग करते हुए उग्रवादी गतिविधियों से संबंध समाप्त करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास जताने की बात कही।
आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान केकेबीएन डिवीजन के स्टेट कमेटी सदस्य सानू पोट्टम उर्फ नीतू, डिविजनल कमेटी सदस्य संताई सलाम उर्फ अनुपा, एरिया कमेटी सदस्य लक्ष्मी मड़वी उर्फ संगीता, एरिया कमेटी सदस्य सुनील तेलम, पार्टी सदस्य मंजुला पुनेम उर्फ शिल्पा, रामबती ओयाम उर्फ जमुना, गणेश कुंजाम, सुशीला दुड़ी, सरिता कुहुडम तथा चोड़ी योगी उर्फ रजनी के रूप में हुई है।
यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम ओडिशा पुलिस द्वारा फुलबानी के रिजर्व पुलिस ग्राउंड में आयोजित किया गया। इस अवसर पर एडीजी (एंटी नक्सल ऑपरेशंस) संजीव पंडा, एसआईडब्ल्यू डीआईजी अखिलेश्वर सिंह, साउथ-वेस्टर्न रेंज डीआईजी नीति शेखर, आईजी ऑपरेशंस दीपक कुमार, सीआरपीएफ आईजी अमितेन्द्रनाथ सिन्हा, डीआईजी सीआरपीएफ दिलीप सिंह, एएसपी रामेंद्र प्रसाद, बालिगुड़ा एसडीपीओ भोसल स्मरण संजय और कंधमाल एसपी हरीशा बी.सी. उपस्थित रहे।
मीडिया से बातचीत में संजीव पंडा ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वालों में एक स्टेट कमेटी सदस्य, एक डिविजनल कमेटी सदस्य, दो एरिया कमेटी सदस्य और छह पार्टी सदस्य शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के रहने वाले इन माओवादियों ने 10 हथियार समेत अन्य गोला-बारूद जमा किए। इन पर कुल 1.15 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
उन्होंने कहा कि नवरंगपुर, बलांगीर, कोरापुट, मलकानगिरि, नुआपड़ा और बौध जिले अब नक्सल-मुक्त हो चुके हैं। पुलिस का लक्ष्य कंधमाल, कलाहांडी और रायगढ़ा के सीमावर्ती इलाकों को भी नक्सल-मुक्त बनाना है। उन्होंने शेष माओवादियों से हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की।