भाई-बहन के साथ आज रथों पर होगा भगवान जगन्नाथ का अधरपणा अनुष्ठान

  • Jul 26, 2026
Khabar East:Adhara-Pana-Ritual-Of-Lord-Jagannath-And-Siblings-To-Be-Held-On-Chariots-In-Puri-Today
पुरी,26 जुलाईः

विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा महोत्सव के तहत भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का पवित्र अधरपणा अनुष्ठान रविवार को उनके-अपने रथों पर संपन्न होगा। इस पारंपरिक अनुष्ठान के लिए श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

मंदिर प्रशासन ने राघवदास मठ और बड़ ओड़िया मठ के सहयोग से अधरपणा अनुष्ठान के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं। इस अनुष्ठान में उपयोग होने वाले नौ विशेष मिट्टी के पात्र (मटके) तैयार कर लिए गए हैं।

एसजेटीए द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, मध्याह्न धूप (भोग) के बाद अधरपणा की तैयारियां शुरू होंगी। रथों पर अनुष्ठानों की शुरुआत सुबह 6 बजे मंगल आरती से ही हो चुकी है। इसके बाद अन्य नीतियां संपन्न की जाएंगी। मध्याह्न धूप दोपहर 3:30 बजे से 4:30 बजे के बीच होगी, जिसके बाद अधरपणा अनुष्ठान प्रारंभ होगा। तीनों रथों पर यह अनुष्ठान रात 8 बजे तक पूरा होने की संभावना है।

नीलाद्रि बीजे के दौरान भगवान के श्रीमंदिर लौटने से पहले होने वाला यह अनुष्ठान रथयात्रा की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक माना जाता है।

 अधरपणा के लिए मंदिर के सेवायत प्राचीन परंपरा के अनुसार दूध, छेना, चीनी, केले और विभिन्न मसालों से एक विशेष पवित्र पेय तैयार करते हैं। इसके बाद इसे भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके-अपने रथों पर अर्पित किया जाता है।

 अनुष्ठान के दौरान अधरपणा से भरे बड़े मिट्टी के पात्र भगवान के अधरों (होंठों) के पास रखे जाते हैं। इसी कारण इस अनुष्ठान का नाम 'अधरपणा' पड़ा है, जिसमें 'अधर' का अर्थ होंठ और 'पणा' का अर्थ पेय है।

सेवायत वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के साथ इस पवित्र पेय का अर्पण करते हैं। अर्पण पूर्ण होने के बाद प्राचीन परंपरा के अनुसार रथों पर ही इन मिट्टी के पात्रों को फोड़ दिया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह अधरपणा केवल भगवान को ही नहीं, बल्कि उन देवताओं, पार्षदों और अदृश्य दिव्य शक्तियों को भी समर्पित किया जाता है, जो रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के साथ रहती हैं।

 मिट्टी के पात्रों का फोड़ा जाना इस पवित्र अनुष्ठान की पूर्णाहुति का प्रतीक माना जाता है और यह भगवान के श्रीमंदिर लौटने से पहले संपन्न होने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है।

अधरपणा अनुष्ठान आज भी भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा से जुड़ी सबसे श्रद्धापूर्ण और महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक माना जाता है।

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