ब्रिक्स डीआरआर बैठक में मुख्य अतिथि होंगे मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी

  • Jun 01, 2026
Khabar East:CM-Majhi-To-Attend-BRICS-Disaster-Risk-Reduction-Meeting-In-Puri-As-Chief-Guest
भुवनेश्वर,01 जूनः

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी तीन से पांच जून तक पुरी में आयोजित होने वाली ब्रिक्स (BRICS) आपदा जोखिम न्यूनीकरण (डीआरआर) कार्य समूह की दूसरी तकनीकी बैठक के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह जानकारी सोमवार को राज्य के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने दी।

भुवनेश्वर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पुजारी ने कहा कि आपदा तैयारी, चक्रवात प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के क्षेत्र में ओडिशा की वैश्विक स्तर पर सराही गई उपलब्धियों को देखते हुए इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी के लिए राज्य का चयन किया गया है।

 बैठक का उद्घाटन सत्र चार जून को आयोजित होगा, जिसमें ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता तथा आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ शामिल होंगे। इसके अलावा भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम में भाग लेंगे।

तीन दिवसीय इस बैठक का विषय नवाचार, सहयोग और सतत विकास के माध्यम से आपदा प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ बनाना रखा गया है।

 सुरेश पुजारी ने इसे ओडिशा, विशेषकर पुरी के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि यह राज्य के सफल आपदा प्रबंधन मॉडल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने प्रस्तुत करने का अवसर है। साथ ही, इससे आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूती मिलेगी।

 ब्रिक्स दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, ईरान और इंडोनेशिया शामिल हैं। ये देश मिलकर दुनिया की लगभग आधी आबादी और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के एक-तिहाई से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।

 मंत्री ने बताया कि ब्रिक्स डीआरआर कार्य समूह की पहली तकनीकी बैठक इस वर्ष 29 और 30 अप्रैल को भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई थी।

 पुरी में होने वाली चर्चा में सामुदायिक आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण शासन, आपदा जोखिम वित्तपोषण, बहु-आपदा प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, जलवायु-लचीला बुनियादी ढांचा, प्रकृति आधारित एवं पारंपरिक समाधान तथा आपदा प्रबंधन में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे।

तकनीकी सत्रों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सतत वित्तपोषण मॉडल, समावेशी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, मजबूत बुनियादी ढांचे और पारंपरिक ज्ञान को आपदा प्रबंधन रणनीतियों में शामिल करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल रामचंडी का भी दौरा करेगा, जहां ओडिशा की आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए नौका बचाव (बोट रेस्क्यू) प्रदर्शन अभ्यास आयोजित किया जाएगा।

 पुजारी ने कहा कि इस बैठक से तकनीकी रिपोर्ट और नीतिगत रूपरेखाएं तैयार होने की उम्मीद है, जो ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने, प्रभावी वित्तपोषण मॉडल की पहचान करने और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देने में सहायक होंगी।

 उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन ओडिशा को आपदा प्रतिरोधक क्षमता के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी राज्य के रूप में और अधिक स्थापित करेगा तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की पहचान को नई मजबूती प्रदान करेगा।

Author Image

Khabar East

  • Tags: