सभी विभागों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अनिवार्य, कीमत की सीमा तय

  • Jun 01, 2026
Khabar East:Odisha-Govt-Mandates-Electric-Vehicles-For-Departments-Sets-Price-Limits
भुवनेश्वर,01 जूनः

पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न ईंधन और ऊर्जा संबंधी चुनौतियों तथा बढ़ते ईंधन व्यय को देखते हुए ओडिशा सरकार ने सभी विभागों को सरकारी उपयोग के लिए केवल इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) खरीदने का निर्देश दिया है। विभिन्न श्रेणी के पदाधिकारियों के लिए वाहनों की अधिकतम कीमत भी निर्धारित कर दी गई है। वित्त विभाग ने 30 मई 2026 को जारी एक कार्यालय ज्ञापन (ऑफिस मेमोरेंडम) के माध्यम से यह नई गाइडलाइन जारी की है।

 ज्ञापन के अनुसार, सरकारी विभागों द्वारा खरीदे जाने वाले सभी नए इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत निर्धारित सीमा के भीतर होनी चाहिए। राज्यपाल, मुख्यमंत्री, ओडिशा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायाधीशों तथा मंत्रियों के लिए वाहन की अधिकतम कीमत 30 लाख रुपये तय की गई है।

 मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, कृषि उत्पादन आयुक्त, सचिव स्तर के अधिकारी (अतिरिक्त मुख्य सचिव और प्रधान सचिव सहित) तथा उनके समकक्ष अधिकारियों के लिए यह सीमा 25 लाख रुपये निर्धारित की गई है। वहीं जिला एवं सत्र न्यायाधीश, जिलाधिकारी (कलेक्टर), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और समकक्ष अधिकारियों के लिए अधिकतम कीमत 20 लाख रुपये होगी।

 ज्ञापन में कहा गया है कि ईवी की खरीद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार और वित्त विभाग की पूर्व सहमति प्राप्त करने के बाद ही की जाएगी। नए वाहन तभी खरीदे जा सकेंगे जब मौजूदा वाहन अपनी निर्धारित सेवा अवधि पूरी कर चुके हों और उन्हें अनुपयोगी घोषित कर स्क्रैप किया जा चुका हो।

सरकारी विभागों को जहां संभव हो, वाहन खरीद के लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की सलाह भी दी गई है।

 नई गाइडलाइन के तहत केवल टाटा मोटर्स, महिंद्रा और मारुति द्वारा निर्मित वाहनों की खरीद की अनुमति दी गई है। इसके अलावा, प्रधान सचिव स्तर के किसी भी अधिकारी द्वारा एक से अधिक वाहन रखने पर स्पष्ट रूप से रोक लगा दी गई है।

इस बीच पेट्रोल और डीजल वाहनों की खरीद पर कड़ी पाबंदी लगाई गई है। ऐसे वाहन केवल विशेष परिस्थितियों में और वित्त विभाग की मंजूरी मिलने पर ही खरीदे जा सकेंगे।

 ये निर्देश केवल राज्य सरकार के विभागों पर ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार द्वारा समर्थित उपक्रमों, संस्थानों, विश्वविद्यालयों और विभिन्न समितियों/सोसाइटियों पर भी लागू होंगे। राज्यपाल की मंजूरी से जारी यह आदेश 1 जून 2026 से प्रभावी हो गया है।

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