लोकतंत्र को हर नागरिक के लिए समानता सुनिश्चित करनी चाहिए और बदलती वैश्विक व्यवस्था तथा तकनीक से उत्पन्न नई चुनौतियों के बावजूद यह सिद्धांत कभी नहीं बदल सकता। यह बात ओडिशा विधानसभा की अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में कही। सम्मेलन के ‘सुगम संसद: दिव्यांगजनों का समावेशन’ विषयक सत्र में भाग लेते हुए अध्यक्ष पाढ़ी ने ऋषि अष्टावक्र का उदाहरण दिया और कहा कि भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता में दिव्यांगजनों के योगदान से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, “कई दिव्यांगजनों ने भारतीय लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व किया है और राष्ट्र की प्रगति में योगदान दिया है।”
पाढ़ी ने कहा कि 2024 के आम चुनाव में 90 लाख से अधिक दिव्यांगजन मतदाता के रूप में पंजीकृत थे। उन्होंने कहा कि संसद और विधानसभाओं के डिजिटलीकरण से दिव्यांगजनों का प्रतिनिधित्व और भागीदारी और अधिक सुनिश्चित होगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ ने दिव्यांगजनों के लिए समानता, सुगमता और भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने दिव्यांग छात्रों की शिक्षा में सहायता के लिए ओडिशा सरकार की ‘बाणीश्री छात्रवृत्ति’ और ‘भीम भोई भिन्नक्षम सामर्थ्य अभियान’ जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य में सहायक उपकरण, कौशल विकास, पुनर्वास, विशेष शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, खेल और आजीविका के अवसरों के लिए भी सहायता प्रदान की जा रही है।
इस अवसर पर झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो, राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर और महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शिंदे भी मौजूद रहे और चर्चा में भाग लिया।
उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी के साथ उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई और विधानसभा सचिव सत्यब्रत राउत भी सम्मेलन में शामिल हुए हैं।