भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार को विपक्षी कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है। भुवनेश्वर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि पूरी दुनिया इस समय भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, लेकिन मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है।
विश्व बैंक की 2025 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 12-13 वर्षों में भारत ने गरीबी कम करने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रक्षा विनिर्माण और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा भी मजबूत हुई है।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि देश और विदेश में कुछ ताकतें भारत की प्रगति से असहज हैं और विपक्ष उनके हाथों का औजार बन गया है।
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि आज विपक्ष जिस तरह का व्यवहार कर रहा है, उससे ऐसा लगता है कि वह भारत की प्रगति और देश के बढ़ते गौरव को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। ऐसे समय में कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भारतीय लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं।
कई राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस वर्ष 2000 से ओडिशा में सरकार नहीं बना पाई है। इसके अलावा गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम में भी कांग्रेस को पिछले कई दशकों से चुनावी हार का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने कहा कि इन राज्यों में लोकसभा की कुल करीब 230 सीटें हैं। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि इन क्षेत्रों में कमजोर चुनावी उपस्थिति के बावजूद कांग्रेस बाकी सीटों से बड़े बहुमत की उम्मीद कैसे कर सकती है।
मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया की जानकारी देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि निर्वाचन आयोग की प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नियुक्त बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार होते हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल इस प्रक्रिया की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर आपत्तियां दर्ज कराने के लिए बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त करते हैं। देशभर में करीब 12 लाख बीएलओ और 22 लाख बीएलए की मौजूदगी का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने आपत्तियां क्यों नहीं दर्ज कराईं।
उन्होंने कहा कि संशोधित मतदाता सूचियां पहले जिला स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ साझा की गईं और बाद में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर भी उपलब्ध कराई गईं। इस तरह राजनीतिक दलों को आपत्तियां दर्ज कराने के पर्याप्त अवसर मिले।
त्रिवेदी ने केरल और कर्नाटक के कांग्रेस नेताओं के बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन राज्यों के कुछ नेताओं ने एसआईआर के जरिए फर्जी मतदाता प्रविष्टियों को हटाने की आवश्यकता स्वीकार की है।
मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों पर जवाब देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान ऐसे मतदाताओं के नामों की समीक्षा की गई, जिन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया था, जिनके नाम एक से अधिक बार दर्ज थे या जिनका पता नहीं चल पाया था।
उन्होंने विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों की भी आलोचना की। इसमें आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) में की गई कार्रवाई और प्रधानमंत्री आवास समेत विभिन्न संस्थानों के बाहर हुए प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इन गतिविधियों का उद्देश्य राजनीतिक अस्थिरता पैदा करना और संवैधानिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर करना है।