आईएमएस एंड सम हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने समय से पहले जन्मे एक गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया है। यह शिशु गर्भावस्था के केवल 24वें सप्ताह में एक अन्य अस्पताल में जन्मा था। अस्पताल में भर्ती के समय उसका वजन मात्र 630 ग्राम था। गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आईएमएस एंड सुम हॉस्पिटल के नियोनेटल आईसीयू (NICU) में भर्ती किया गया।
इतने कम समय में जन्मे और बेहद कम वजन वाले नवजातों के जीवित बचने की संभावना सामान्यतः बहुत कम होती है। ऐसे में डॉक्टरों ने शिशु का अत्याधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के तहत इलाज किया। उसे पहले इनवेसिव वेंटिलेशन, फिर एनआईवी (नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन) और सीपीएपी (CPAP) सपोर्ट दिया गया। साथ ही उसे पैरेंट्रल न्यूट्रिशन के माध्यम से पोषण उपलब्ध कराया गया।
डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लगातार निगरानी, समर्पित देखभाल और प्रभावी उपचार के कारण नवजात की हालत में धीरे-धीरे सुधार होने लगा। नियोनेटल यूनिट के सभी डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों के सामूहिक प्रयास से यह चुनौतीपूर्ण उपचार सफल रहा।
नियोनेटोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. देवाशीष नंद ने पूरी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।
इलाज करने वाली टीम में डॉ. भवग्राही मलिक, डॉ. रतन कुमार दास, डॉ. विजय कुमार, डॉ. बिनीत पाणिग्रही, डॉ. पायल प्रधान, डॉ. कल्पिता साहू, डॉ. सुरेश त्रिपाठी, डॉ. सितिकंठ नायक, डॉ. श्रुतिप्रज्ञा कर, डॉ. शरत चंद्रिका, डॉ. अद्याशा कानूनगो और डॉ. शुभलक्ष्मी साहू शामिल थे।
डॉ. देवाशीष नंद ने नवजात के माता-पिता की भी सराहना की और कहा कि बच्चे को बचाने की इस लंबी लड़ाई में उनका धैर्य और सहयोग बेहद महत्वपूर्ण रहा।
बच्चे के माता-पिता ने नियोनेटल टीम के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनकी समर्पित सेवा की प्रशंसा की।
अस्पताल की डीन डॉ. संघमित्रा मिश्रा तथा मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. पुष्पराज सामंतसिंहार ने इस जटिल मामले के उपचार के लिए आवश्यक सभी चिकित्सा सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराए।