उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को हाई सीज़ (गहरे समुद्री क्षेत्रों) में मत्स्य संसाधनों के सतत दोहन के लिए प्राधिकरण पत्र जारी करने के राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस पहल के साथ भारत के तटीय क्षेत्रों से परे विशाल समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करने के लिए एक नए ढांचे की शुरुआत हुई।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने 'ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन' दस्तावेज का भी लोकार्पण किया और देश के विभिन्न हिस्सों से आए 10 फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीपीओ) तथा मछुआरों को प्राधिकरण पत्र प्रदान किए। यह कार्यक्रम भुवनेश्वर में आयोजित किया गया।
इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पहल भारत की समुद्री यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत है। इसके माध्यम से भारतीय मछुआरे देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र और हाई सीज़ में उपलब्ध अपार समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केंद्र सरकार, ओडिशा सरकार और मछुआरा समुदायों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य मत्स्य क्षेत्र में विकास, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है।
भारत की समुद्री संपदा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश की 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी समुद्री तटरेखा है और लगभग 24 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) है, जिसकी समुद्री संपदा का बड़ा हिस्सा अभी भी पूरी तरह उपयोग में नहीं लाया जा सका है। उन्होंने कहा कि अब तक मछली पकड़ने की गतिविधियां मुख्य रूप से तटीय क्षेत्रों तक सीमित थीं, लेकिन नया ढांचा भारतीय मछुआरों को टूना जैसी उच्च मूल्य वाली मछलियों के सतत दोहन के लिए गहरे समुद्र में जाने का अवसर देगा।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन चुका है और वैश्विक मत्स्य उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी लगभग आठ प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि मत्स्य क्षेत्र से लगभग तीन करोड़ मछुआरों और मत्स्य पालकों की आजीविका जुड़ी हुई है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में देश का समुद्री खाद्य निर्यात 73,000 करोड़ रुपये से अधिक रहा।
समुद्री संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि सतत मत्स्य पालन केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। आर्थिक विकास और समुद्री जैव विविधता के संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। इसके लिए डिजिटल प्राधिकरण प्रणाली, पोतों की ट्रैकिंग, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन तथा अवैध, बिना सूचना और अनियमित (आईयूयू) मत्स्य पालन पर रोक लगाने के उपायों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने युवाओं से मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक, तकनीक आधारित और वैश्विक अवसरों से भरपूर पेशे के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विभिन्न संस्थानों से भी अपील की है कि वे ज्ञान, नवाचार, तकनीक और वित्तीय सहायता के माध्यम से मछुआरा समुदायों का निरंतर सहयोग करें, ताकि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को साकार किया जा सके।
इस कार्यक्रम में ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, ओडिशा के मत्स्य एवं एमएसएमई राज्य मंत्री गोकुलानंद मलिक, केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, मत्स्य संस्थानों के प्रतिनिधि, मछुआरा संगठनों के प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।