भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के भव्य रथों का खींचना शुक्रवार सुबह फिर से शुरू हो गया है। बड़दांड (ग्रैंड रोड) पर रातभर रथों के रुकने के बाद सुबह की सभी नीतियां (पूजा-अर्चना) पूरी होने पर करीब सुबह 9:30 बजे तीनों रथ—नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन—दोबारा आगे बढ़े। इससे पुरी में मौजूद लाखों श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई।
रिपोर्ट के अनुसार, भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ फायर स्टेशन चौक पर, देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ मरीचीकोट चौक पर और भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ श्रीजगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार के पास खड़ा था। रथ खींचने का क्रम दोबारा शुरू होते ही पूरा बड़दांड 'जय जगन्नाथ' के जयघोष, घंटियों और शंखध्वनि से गूंज उठा।
पवित्र नगरी पुरी में रातभर रुके हजारों श्रद्धालु सुबह होते ही पूरे उत्साह के साथ रथों की विशाल रस्सियां खींचने में शामिल हुए। तीनों रथ अब 12वीं शताब्दी के श्रीजगन्नाथ मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं।
मान्यता है कि रथयात्रा के दौरान पवित्र रथों को छूने मात्र से भी भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है। रथों के दोबारा चलने से पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा के उत्सव में एक बार फिर नया उत्साह और भक्ति का संचार हो गया।