छठे राष्ट्रीय चिलिका पक्षी महोत्सव का उद्घाटन आज भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन के सम्मेलन कक्ष में किया गया। इस महोत्सव का संयुक्त आयोजन पर्यटन विभाग तथा वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा किया जा रहा है।
मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल उपमुख्यमंत्री प्रभाति परिड़ा ने कहा कि ओडिशा के तटवर्ती क्षेत्रों में प्रवासी पक्षियों का प्रतिवर्ष आगमन राज्य की अनुकूल जलवायु और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने संरक्षित एवं आरक्षित वनों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण ही सतत और जिम्मेदार पर्यटन की आधारशिला है। उन्होंने चिलिका की समृद्ध जैव विविधता की रक्षा के लिए संरक्षण प्रयासों को और सशक्त करने के साथ-साथ प्रवासी पक्षियों के आगमन, आवागमन और उनके आवास की निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर भी बल दिया।
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने दोहराया कि पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन ओडिशा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और विविध पक्षी प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध चिलिका झील न केवल एक पारिस्थितिक धरोहर है, बल्कि स्थानीय समुदायों की आजीविका का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय पक्षी महोत्सव से चिलिका की पहचान और आकर्षण को और बल मिलेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रमुख सचिव भास्कर ज्योति शर्मा, पर्यटन विभाग के आयुक्त-सह-सचिव बलवंत सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख सुरेश पंत, तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक प्रकाश कुमार झा शामिल थे। इनके अलावा वरिष्ठ अधिकारी, पक्षी प्रेमी और विषय विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।