ओडिशा में 20 लाख से अधिक वाहनों के आरसी रद्द होने का खतरा

  • Aug 28, 2026
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भुवनेश्वर,28 अगस्तः

ओडिशा में 20 लाख से अधिक वाहन लंबे समय से अनिवार्य दस्तावेज और नियमों का पालन नहीं करने के कारण परिवहन विभाग के रडार पर हैं। इनमें इंश्योरेंस, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट, प्रदूषण प्रमाणपत्र (PUC) और टैक्स से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

जो वाहन मालिक निर्धारित समय के भीतर अपने दस्तावेज दुरुस्त नहीं कराते या कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं देते, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे वाहनों को टेम्परेरी आर्काइवसे परमानेंट आर्काइव श्रेणी में स्थानांतरित किया जा सकता है।

 परिवहन आयुक्त अमिताभ ठाकुर ने कहा कि आवश्यक दस्तावेजों के बिना चल रहे वाहनों को नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों की श्रेणी में रखा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि नोटिस का जवाब नहीं देने पर कार्रवाई की जा सकती है।

 ठाकुर ने कहा कि अगर किसी वाहन के पास परमिट, फिटनेस या इंश्योरेंस नहीं है, तो वह गैर-अनुपालन वाली श्रेणी में आता है। वाहन मालिकों को कारण बताओ नोटिस के जरिए जवाब देने का अवसर दिया जा रहा है। लेकिन निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और उनके वाहनों को टेम्परेरी आर्काइव से परमानेंट आर्काइव में भेजा जा सकता है।

 तीन साल से अधिक समय से बिना इंश्योरेंस वाले वाहन और दो साल से अधिक समय से फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं रखने वाले वाहन भी जांच के दायरे में हैं। इसके अलावा 15 साल से अधिक पुराने ऐसे वाहन, जिनके पास आवश्यक फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है, साथ ही वैध प्रदूषण प्रमाणपत्र और टैक्स दस्तावेजों के बिना चल रहे वाहनों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

 ठाकुर ने कहा कि नियमों के अनुपालन के लिए चलाया जा रहा यह अभियान राजस्व जुटाने के लिए नहीं, बल्कि वाहन मालिकों और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए है। उन्होंने दुर्घटना की स्थिति में थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के महत्व पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा कि इंश्योरेंस मुख्य रूप से वाहन मालिक के लिए सुरक्षा कवच है। यदि बिना इंश्योरेंस वाला वाहन दुर्घटना का शिकार होता है, तो मालिक को बीमा कंपनी से मुआवजा नहीं मिल सकता और दुर्घटना से उत्पन्न पूरी वित्तीय देनदारी उसे खुद उठानी पड़ सकती है।

 सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ सुब्रत नंद ने कहा कि नियमों के पालन के लिए जुर्माने के साथ-साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जाना चाहिए। प्रवर्तन की कार्रवाई केवल जुर्माना वसूलने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। परिवहन विभाग को नियमों के उल्लंघन के परिणामों के बारे में लोगों को समझाना चाहिए और वाहन मालिकों को यह बताना चाहिए कि वे खुद और दूसरों को किन जोखिमों में डाल रहे हैं।

 उन्होंने कहा कि यह अभियान केंद्र के निर्देशों के बाद चलाया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने इंश्योरेंस, फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र, टैक्स और री-रजिस्ट्रेशन से जुड़ी आवश्यकताओं पर नजर रखने के लिए एक डिजिटल वाहन डेटाबेस की जरूरत पर जोर दिया।

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