तृणमूल कांग्रेस के बैंक खाते फ्रीज किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई की। न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से पूछा कि क्या पार्टी के रोजमर्रा के खर्चों के लिए सीमित राशि जारी की जा सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल वह मुख्य मामले के गुण-दोष पर नहीं, बल्कि केवल अंतरिम राहत की मांग पर विचार कर रही है। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि बैंक खाते फ्रीज होने से पार्टी कर्मचारियों का वेतन और संगठन के नियमित खर्च प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि पार्टी के सभी बैंक खाते फ्रीज नहीं किए गए हैं और कुछ खातों से नियमित लेनदेन जारी है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासक की निगरानी में सीमित राशि जारी करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इस संबंध में ईडी को निर्देश लेने का समय दिया गया।
मामले की शुरुआत 18 जून को बिधाननगर साइबर थाने में दर्ज शिकायत से हुई थी। शिकायत में तृणमूल कांग्रेस के बैंक खातों के जरिए कथित अवैध वित्तीय लेनदेन का आरोप लगाया गया था। इसके बाद ईडी ने ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू की और जुलाई में पार्टी के एचडीएफसी बैंक के तीन खातों को फ्रीज कर दिया।
ईडी का दावा है कि इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये हैं और इनमें से 133 से 160 करोड़ रुपये कुछ कंपनियों को ट्रांसफर किए गए जिनमें केयरवेल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है। एजेंसी इन लेनदेन की जांच धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कर रही है।