सम्राट चौधरी की सरकार ने गांधी जयंती के मौके पर मानवीय आधार पर अलग-अलग जेलों में बंद 44 बंदियों को कारामुक्त करने का निर्णय लिया है। जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय बंदी परिहार कमेटी की अनुशंसा के आधार पर यह फैसला लिया गया है। लंबे समय से सजा काट रहे बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित बंदी इसमें शामिल हैं। कैदियों को परिहार देने का फैसला सम्राट चौधरी की सरकार ने कैबिनेट में पहले ही ले लिया था। गृह विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। जिला स्तरीय परिहार कमेटी की अनुशंसा और राज्य स्तरीय परिहार कमेटी के फैसले के बाद रिहाई दी गई है। जेलों से रिहाई पाने वालों में उम्रदराज बंदियों की संख्या अधिक है। इनमें दो बंदी 90 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, जबकि आठ बंदी 80 वर्ष से अधिक और 20 बंदी 70 से 80 वर्ष की आयु के हैं। एक गंभीर बीमारी से पीड़ित बंदी को भी मानवीय आधार पर कारामुक्त किया जा रहा है।
रिहा होने वालों में एक महिला बंदी भी शामिल हैं, जिन्होंने पूर्णिया जेल में करीब 20 वर्ष की सजा पूरी की है। रोहतास जेल से 93 वर्षीय रामबृक्ष कोइरी, मधेपुरा से योगेश्वर यादव, 84 वर्षीय हरिवंश राम और 82 वर्षीय रामाशीष यादव समेत अन्य बंदियों को भी रिहाई दी जा रही है। सत्यनारायण सिंह और पंकज गुप्ता को गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के कारण परिहार दिया गया है। पहले भी बुजुर्ग और अच्छे आचरण करने वाले कैदियों को परिहार दिया जाता रहा है। इस बार सम्राट चौधरी की सरकार ने 44 कैदियों को यह लाभ दिया है।
गृह विभाग की ओर से संबंधित अधिसूचना जारी हो चुकी है। जिला और राज्य स्तरीय कमेटियों की अनुशंसा पर लिया गया यह फैसला मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है। रिहाई की प्रक्रिया अब जेल प्रशासन के माध्यम से पूरी की जा रही है।