ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को राज्य के समुद्री तटों को स्वच्छ रखने और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समुद्र ओडिशा की पहचान, विरासत और आजीविका से गहराई से जुड़ा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस के अवसर पर जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि समुद्र तटों को स्वच्छ रखना केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि राज्य की उभरती ब्लू इकोनॉमी को मजबूत करने और तटीय समुदायों की आजीविका सुरक्षित रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा का समुद्री तट केवल समुद्र तटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सांस्कृतिक परंपराएं, धार्मिक विरासत और पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास भी शामिल हैं। पुरी और गोपालपुर से लेकर भितरकनिका के मैंग्रोव और ओलिव रिडले कछुओं के अंडे देने वाले स्थलों तक, राज्य का तट समुद्र के साथ ओडिशा के सदियों पुराने संबंध को दर्शाता है। पुरी के समुद्र को ‘महादधि’ कहे जाने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नाम पौराणिक और शास्त्रीय परंपराओं में मिलता है तथा प्रकृति, आस्था और जगन्नाथ परंपरा के साथ ओडिशा के गहरे संबंध का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समुद्री तटों की रक्षा का मतलब उन लोगों की सुरक्षा भी है, जिनका जीवन और आजीविका समुद्र से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि मछुआरे, नाविक, किसान, महिलाएं, युवा और अन्य तटीय परिवार पीढ़ियों से समुद्र तट पर निर्भर रहे हैं। तटों की सुरक्षा से समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के साथ-साथ ब्लू इकोनॉमी के भविष्य को भी सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
माझी ने समुद्र की सफाई से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया और केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय तथा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के समुद्री तटों और महासागरों की सुरक्षा के लिए नागरिकों, युवाओं और तटीय समुदायों को एकजुट कर व्यापक जनभागीदारी को बढ़ावा दे रही है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से तटीय स्वच्छता को निरंतर जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया, ताकि स्वच्छ समुद्र तट और स्वस्थ महासागर तटीय समुदायों के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी लाभकारी साबित हों।