कलकत्ता हाई कोर्ट में न्यायाधीश सौगत भट्टाचार्य की खंडपीठ में टीएमसी के अकाउंट फ्रीज़ से संबंधित मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल अवकासप्राप्त दो न्यायाधीशों के तत्वावधान में अकाउंट्स को खोलकर न्यूनतम काम करने की अनुमति हाई कोर्ट देना चाहता है। हालांकि उससे पहले अदालत ने बैंक से हलफनामा जमा करने का निर्देश दिया है। 29 जून को तृणमूल के ममता बनर्जी गुट ने अकाउंट को चालू करने का अनुरोध करते हुए कोर्ट में मामला दायर किया था। मामले की अगली सुनवाई 8 जुलाई को होने वाली है। बता दें, राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद से तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक विवाद शुरू हो गया जिसकी वजह से इसके दो गुट भी बन चुके हैं। इसके बाद पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरुप विश्वास ने अकाउंट्स को फ्रीज़ कर देने का अनुरोध किया था। इसके बाद ही पार्टी के 3 बैंक अकाउंट्स को पुलिस ने फ्रीज़ कर दिया था। गत सोमवार (29 जून) को तृणमूल के कालीघाट गुट (ममता बनर्जी गुट) ने अकाउंट को चालू करने का अनुरोध करते हुए कोर्ट में मामला दायर किया था। इसी मामले की आज (2 जुलाई) को कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई थी। सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी गुट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पुलिस की मदद से एक सक्रिय राजनीतिक पार्टी को विकलांग बनाया जा सकता है, यह उसी का उदाहरण है। जिस दिन मामला दायर हुआ उसके अगले दिन ही अकाउंट्स को फ्रीज़ कर दिया गया। 24 घंटे का समय भी नहीं लिया गया था। वहीं न्यायाधीश ने मामला दायर होने के समय को लेकर चिंता जाहिर की। 28 जून की शाम को साढ़े 6 बजे शिकायत दर्ज होने के बाद अगले दिन ही बैंक ने बताया कि अकाउंट्स को फ्रीज़ कर दिया गया है। लेकिन इससे पहले इन अकाउंट्स के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दायर नहीं हुआ था। फिर पुलिस में शिकायत के बाद ही कैसे आनन-फानन में अकाउंट्स को फ्रीज़ कर दिया गया?
अदालत के सवाल का जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पुलिस की जांच की रिपोर्ट जमा दी जाएगी। इस रिपोर्ट में बताया जाएगा कि कैसे उक्त अकाउंट्स के माध्यम से रुपए ‘गबन’ किए गए। तुषार मेहता ने दावा किया कि तृणमूल के अलग-अलग नेता, अलग-अलग बयान दे रहे हैं। कौन ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस में है, इसे लेकर भी सवाल उठ रहा है। इस बारे में बिना विचार किए अकाउंट्स को फिर से चालू करना सही नहीं होगा। इसके बाद ही हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि बैंक को हलफनामा देना पड़ेगा कि किस आधार पर उन्होंने अकाउंट्स को फ्रीज़ किया है और अकाउंट्स में कितने रुपए हैं। इसके बाद ही अगले निर्देश के बारे में सोच-विचार किया जाएगा।