ओडिशा परिवहन विभाग ने ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ ई-डिटेक्शन आधारित प्रवर्तन व्यवस्था लागू करने को लेकर अधिसूचना जारी की है। इसके तहत वाहनों के वैध पीयूसीसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट), इंश्योरेंस और लंबित ई-चालान की जांच की जाएगी। अधिसूचना के अनुसार, सार्वजनिक सड़कों पर चलने वाले सभी मोटर वाहनों के पास मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 और सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 के तहत आवश्यक वैध दस्तावेज होना अनिवार्य है। इनमें प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) और वैध इंश्योरेंस भी शामिल हैं।
कानूनी प्रावधानों और सरकार के आदेशों के अनुसार, वैध पीयूसीसी और इंश्योरेंस के बिना सड़क पर चलने वाले वाहनों की इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पहचान करने के लिए ई-डिटेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इस प्रणाली के माध्यम से नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर MV Act, 1988, CMVR, 1989 और निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक प्रवर्तन प्रक्रिया के तहत ई-चालान जारी किया जाएगा।
विभाग ने वाहन मालिकों को सलाह दी है कि वे अपने पीयूसीसी और इंश्योरेंस की वैधता की जांच करें और सार्वजनिक सड़कों पर वाहन चलाने से पहले आवश्यक दस्तावेज बनवाएं या उनका नवीनीकरण करा लें।
विभाग ने आगे बताया कि CMVR, 1989 के नियम 167 के तहत जिन वाहनों के चालान निर्धारित कानूनी अवधि से अधिक समय तक लंबित रहते हैं, उन्हें निर्धारित पोर्टल पर “Not to be Transacted” के रूप में चिन्हित किया जा सकता है। भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने भी स्पष्ट किया है कि नियम 167 के उद्देश्य से पीयूसी टेस्टिंग भी एक ट्रांजैक्शन मानी जाती है।
इसी के अनुसार, वाहन आधारित पीयूसी टेस्टिंग एप्लिकेशन में लंबित चालान या “Not to be Transacted” स्थिति की जांच की व्यवस्था लागू होगी। जिन वाहन मालिकों के ई-चालान लंबित हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर चालान का निपटारा करने की सलाह दी गई है।
विभाग ने कहा कि ये कदम तकनीक आधारित वैधानिक प्रवर्तन व्यवस्था के तहत लागू किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यातायात अनुशासन सुनिश्चित करना, पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन कराना, तीसरे पक्ष के हितों की सुरक्षा और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है।
वाहन मालिकों से अनुरोध किया गया है कि वे अधिकृत सरकारी पोर्टल के माध्यम से अपने वैधानिक दस्तावेजों की स्थिति और लंबित ई-चालान की स्थिति की जांच करें और सभी आवश्यक नियमों का पालन सुनिश्चित करें।
ई-डिटेक्शन सिस्टम के माध्यम से यह प्रवर्तन व्यवस्था एक सितंबर से लागू हो गई है।