भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की श्रीगुंडिचा मंदिर से श्रीजगन्नाथ मंदिर की ओर वापसी यात्रा बाहुड़ा यात्रा शुक्रवार को पूरे धार्मिक उत्साह और भक्ति भाव के साथ शुरू हुई। बड़दांड (ग्रैंड रोड) पर उमड़े लाखों श्रद्धालुओं के "जय जगन्नाथ" के जयघोष से पूरी नगरी भक्तिमय माहौल में डूब गई। बाहुड़ा यात्रा वार्षिक रथ यात्रा महोत्सव का अंतिम चरण है। 16 जुलाई से शुरू हुए इस महापर्व के तहत भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा नौ दिनों तक अपने जन्मस्थल माने जाने वाले श्रीगुंडिचा मंदिर (जन्म बेदी) में विराजमान रहे। अब तीनों दिव्य विग्रह अपने मूल निवास श्रीजगन्नाथ मंदिर की ओर लौट रहे हैं।
निर्धारित धार्मिक अनुष्ठानों के अनुसार पहंडी बीजे के बाद पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने परंपरागत छेरा पहंरा की रस्म निभाई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने शरधाबाली से लगभग तीन किलोमीटर लंबे बड़दांड मार्ग पर तीनों भव्य रथों को खींचते हुए श्रीमंदिर के सिंहद्वार की ओर रवाना किया।
दिनभर के धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत सुबह 4 बजे मंगला आरती से हुई। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे पहंडी बीजे की रस्म प्रारंभ हुई। इस दौरान भगवान बलभद्र और भगवान जगन्नाथ को पारंपरिक धाड़ी पहंडी के माध्यम से क्रमशः तलध्वज और नंदीघोष रथ पर विराजमान कराया गया। वहीं देवी सुभद्रा और सुदर्शन को दर्पदलन रथ पर स्थापित किया गया।
पहंडी अनुष्ठान पूरा होने के बाद भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाने वाले गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने स्वर्ण-मूठ वाली झाड़ू से तीनों रथों की सफाई कर छेरा पहंरा की परंपरा निभाई। यह रस्म भगवान के समक्ष समानता, विनम्रता और सेवा भाव का प्रतीक मानी जाती है।
शाम करीब 4:37 बजे भगवान बलभद्र का तालध्वज रथ सबसे पहले आगे बढ़ा। इसके बाद देवी सुभद्रा का दर्पदलन रथ और अंत में भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ सिंहद्वार की ओर रवाना हुआ।
पूरे पुरी शहर में शंख, घंटी, मृदंग, झांझ और हरिनाम संकीर्तन की गूंज सुनाई देती रही। श्रद्धालु, सेवायत और सुरक्षा बल के जवान इस भव्य धार्मिक शोभायात्रा में पूरे उत्साह के साथ शामिल हुए।
सिंहद्वार पहुंचने के बाद तीनों देवता अपने-अपने रथों पर विराजमान रहेंगे। शनिवार को सुना बेश के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया जाएगा, जिसके दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसके बाद रविवार को अधरपणा की विशेष धार्मिक रस्म संपन्न होगी।
वार्षिक रथ यात्रा महोत्सव का समापन 27 जुलाई को नीलाद्रि बीजे के साथ होगा। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा विधिवत श्रीजगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ इस वर्ष की रथ यात्रा का औपचारिक समापन हो जाएगा।