एमएमडीआर एक्ट से राजस्व पर असर का अभी आकलन नहीं

  • Sep 24, 2026
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भुवनेश्वर,24 सितंबरः

ओडिशा सरकार ने गुरुवार को विधानसभा में बताया कि संशोधित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम (एमएमडीआर एक्ट) लागू होने के बाद खनिज संपदा से समृद्ध ओडिशा को होने वाले संभावित वित्तीय लाभ या नुकसान का अभी तक कोई आकलन नहीं किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों से राज्य सरकारों की खनिज अधिकारों और खनिज वाली जमीन पर टैक्स, सेस तथा अन्य शुल्क लगाने की शक्तियां सीमित हो गई हैं। कई विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए इस्पात एवं खान मंत्री विभूति भूषण जेना ने कहा कि संशोधित एमएमडीआर अधिनियम के प्रावधानों से होने वाले वित्तीय लाभ या नुकसान का इस स्तर पर कोई विशेष आकलन नहीं किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा जरूरी नियम और विनियम तैयार किए जाने के बाद राज्य सरकार इसके वित्तीय प्रभाव का आकलन करेगी।

 उन्होंने कहा कि राज्य के खनिज संसाधनों और राजस्व हितों की सुरक्षा के लिए मौजूदा कानूनों और वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप उचित कदम उठाए जाएंगे। भाजपा विधायक प्रकाश सोरेन ने जानना चाहा था कि संशोधित कानून से ओडिशा को फायदा होगा या नुकसान, संभावित लाभ या नुकसान कितना होगा और राज्य के हितों की रक्षा के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है।

 बीजद विधायक कलिकेश नारायण सिंह देव ने भी पूछा कि क्या सरकार ने एमएमडीआर संशोधन एक्ट, 2026, खासकर इसकी धारा 9D, के ओडिशा के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया है। धारा 9D के तहत केंद्र की मंजूरी के बिना राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर स्वतंत्र रूप से टैक्स या सेस लगाने से रोका गया है।

 जेना ने कहा कि राज्य सरकार ने खनिज अधिकारों और खनिज वाली जमीन पर टैक्स या शुल्क से होने वाले राज्य के राजस्व पर धारा 9D के प्रभाव का मात्रात्मक आकलन नहीं किया है।

 विधानसभा में विपक्ष के नेता और बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने दावा किया है कि संशोधित कानून के कारण ओडिशा को 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के टैक्स बकाये और करीब 12,000 करोड़ रुपये के सालाना राजस्व का नुकसान हो सकता है।

इस पर मंत्री ने कहा कि इस स्तर पर राज्य सरकार ने अभी तक यह अंतिम आकलन नहीं किया है कि संभावित रूप से वसूल न हो पाने वाले बकाये की वास्तविक राशि कितनी होगी या धारा 9D के कारण सालाना राजस्व पर कितना प्रभाव पड़ेगा।

 ओडिशा के महाधिवक्ता द्वारा सुप्रीम कोर्ट में खनिज वाली जमीन पर शुल्क लगाने को सही ठहराने के विपक्ष के संदर्भ पर जेना ने कहा कि ओडिशा रिव्यू में प्रकाशित या सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखे गए आंकड़ों और पक्षों को धारा 9D के मौजूदा वित्तीय प्रभाव का आकलन करने के लिए विभागीय आकलन नहीं माना जा रहा है।

 उन्होंने कहा कि संशोधित प्रावधान के कानूनी और व्यावहारिक प्रभाव पूरी तरह स्पष्ट होने के बाद ही इस तरह की तुलना की जाएगी। वर्ष 2025-26 में ओडिशा को खनन क्षेत्र से 51,127 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

 इस मुद्दे पर सवाल उठाने वाले अन्य विधायकों में बीजद के गणेश्वर बेहरा, ब्योमकेश राय, सारदा प्रसाद नायक और प्रताप केशरी देव, कांग्रेस के ताराप्रसाद वाहिनीपति और निलंबित बीजद विधायक अरविंद महापात्र शामिल थे।

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