ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को वर्ष 2008 में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती और चार अन्य लोगों की हत्या से संबंधित न्यायमूर्ति एएस नायडू आयोग की रिपोर्ट के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से कथित रूप से गायब होने के मामले की जांच औपचारिक रूप से अपने हाथ में ले ली।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर सीआईडी-क्राइम ब्रांच ने इस मामले को सीआईडी सीबी थाना कांड संख्या 09/2026 (28 जुलाई 2026) के रूप में दोबारा दर्ज किया है। मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 305, 316(2), 238(सी), 241 और 61(2)(बी) के तहत दर्ज किया गया है।
क्राइम ब्रांच ने बयान में कहा कि निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करने तथा जनहित को ध्यान में रखते हुए यह मामला कैपिटल थाना कांड संख्या 460/2026 से अपने अधीन लिया गया है।
मामले की जांच की जिम्मेदारी डीएसपी आशुतोष मिश्रा को सौंपी गई है, जबकि जांच की निगरानी क्राइम ब्रांच के पुलिस अधीक्षक अनिरुद्ध राउतराय करेंगे।
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री द्वारा एक दिन पहले क्राइम ब्रांच को इस मामले की जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिए जाने के बाद की गई है।
गौरतलब है कि 10 जून 2026 को गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की लिखित शिकायत के आधार पर कैपिटल थाना में मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में कंधमाल हिंसा से संबंधित न्यायमूर्ति एएस नायडू आयोग की रिपोर्ट तथा 2016 के सम अस्पताल अग्निकांड की राजस्व मंडल आयुक्त (RDC) जांच रिपोर्ट के मुख्यमंत्री कार्यालय से गायब होने का आरोप लगाया गया था।
पहले की जांच के दौरान कमिश्नरेट पुलिस ने पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के करीबी सहयोगी रहे पूर्व आईएएस अधिकारी वीके पांडियन सहित चार पूर्व नौकरशाहों को अलग-अलग तिथियों पर बयान दर्ज कराने के लिए तलब किया था।
अब तक केवल पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी सचिव मनोज कुमार मिश्रा ही जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज करा चुके हैं। अन्य अधिकारियों से अभी पूछताछ की जानी बाकी है।