भुवनेश्वर स्थित साइबर क्राइम एंड इकोनॉमिक ऑफेंस पुलिस स्टेशन ने एक सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर से 9 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले में मयूरभंज जिले के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह को अपने बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मयूरभंज जिले के झारपोखरिया निवासी राजेंद्र सिंह के रूप में हुई है।
कमिश्नरेट पुलिस की एसीपी, आईटी एवं सोशल मीडिया सेल, सुचिस्मिता दास ने बताया कि मामले का खुलासा तब हुआ जब खंडगिरी निवासी सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर चिदानंद ने 25 जून 2025 को साइबर क्राइम एंड इकोनॉमिक ऑफेंस पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस के अनुसार, चिदानंद ने सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों के लिए क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का दावा करने वाला एक फेसबुक विज्ञापन देखा। विज्ञापन पर क्लिक करने के बाद उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने कथित तौर पर खुद को इंडियन बैंक का अधिकारी बताया।
फोन करने वाले व्यक्ति ने उनसे व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को कहा और बाद में व्हाट्सऐप के जरिए एक लिंक भेजा। शिकायतकर्ता ने अपने लैपटॉप पर लिंक खोला और उसमें अपनी व्यक्तिगत एवं बैंकिंग संबंधी जानकारी दर्ज कर दी।
इसके दो दिन बाद उनके बैंक खाते से कथित तौर पर 9 लाख रुपये निकाल लिए गए। बैंक की शिकायत निवारण व्यवस्था के जरिए समस्या का समाधान नहीं होने पर चिदानंद ने साइबर क्राइम एंड इकोनॉमिक ऑफेंस पुलिस स्टेशन का रुख किया और शिकायत दर्ज कराई।
जांच के दौरान पुलिस ने ठगी गई रकम में से 5 लाख रुपये को लेनदेन की पहली परत में ओडिशा के एक बैंक खाते तक ट्रेस किया। यह खाता कथित तौर पर राजेंद्र सिंह के नाम पर था।
इसके बाद पुलिस ने सिंह का पता लगाकर उसे मयूरभंज जिले के झारपोखरिया से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ के दौरान सिंह ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करता है और कृषि गतिविधियों से भी जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, उसकी मुलाकात लिपु नामक एक एजेंट से हुई थी, जो बालेश्वर-मयूरभंज क्षेत्र में सक्रिय है और कथित तौर पर साइबर ठगों के लिए म्यूल बैंक खाते उपलब्ध कराता है।
पुलिस के अनुसार, लिपु ने सिंह को पैसे के बदले अपने बैंक खाते उपलब्ध कराने के लिए कथित तौर पर लालच दिया। खातों को उपलब्ध कराने के बदले सिंह को कथित तौर पर 6,000 रुपये नकद और हांडिया (चावल से तैयार पारंपरिक किण्वित मादक पेय) दिया गया।
पुलिस ने बताया कि सिंह ने अलग-अलग समय पर लिपु को कुल छह बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। जांच में यह भी सामने आया कि एजेंट ने कई म्यूल खातों को खुलवाने में मदद की थी, जिनके जरिए कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर किया जाता था।
एसीपी दास ने कहा कि हमने इस नेटवर्क के बीच संबंधों का पता लगा लिया है और इसमें शामिल लोगों की पहचान की जा रही है। गिरोह में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क बालेश्वर, मयूरभंज, भुवनेश्वर और देवगढ़ में सक्रिय था। जांचकर्ता आरोपी और गिरोह के अन्य सदस्यों के बीच संबंधों की भी जांच कर रहे हैं।
अब पुलिस एजेंट लिपु का पता लगाने के साथ-साथ म्यूल खातों के संचालन और ठगी की रकम को इधर-उधर करने में शामिल अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।