वर्ष 2024 की ओडिशा पुलिस सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि नए साक्ष्यों से ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (ओपीआरबी) के कुछ अधिकारियों और निजी संस्थाओं की संभावित संलिप्तता के संकेत मिले हैं, जो अब तक जांच के दायरे से बाहर थे।
अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय एजेंसी उम्मीदवारों से नकद वसूली के जरिए कथित अपराध से अर्जित रकम का भी पता लगा रही है। साथ ही, यह जांच की जा रही है कि क्या इस पैसे का इस्तेमाल अवैध संपत्तियां खरीदने में किया गया, जिन्हें धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जब्त किया जा सकता है।
जांच के सिलसिले में ईडी ने पिछले सप्ताह ओडिशा और पश्चिम बंगाल में करीब एक दर्जन ठिकानों पर तलाशी ली थी। इनमें परीक्षा के आयोजन से जुड़ी कंपनियों सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड, पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और PSIL इंटरनेशनल लिमिटेड से जुड़े परिसर भी शामिल थे।
14 अक्टूबर को जारी एक बयान में ईडी ने कहा था कि जांच के दौरान ऐसी कंपनियों और संस्थाओं की भूमिका का पता चला है, जो अब तक जांच एजेंसियों के दायरे से बाहर थीं।
एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान ओपीआरबी से जुड़े लोगों समेत कुछ अन्य व्यक्तियों की संभावित संलिप्तता के संकेत भी मिले हैं।
ईडी ने कहा कि अब तक की जांच और तलाशी के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि प्रश्नपत्र कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से लीक किया गया था। उम्मीदवारों से नकद भुगतान के जरिए अपराध से बड़ी रकम अर्जित किए जाने की भी बात सामने आई है।
एजेंसी के अनुसार, ओपीआरबी ने परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम आईटीआई लिमिटेड को सौंपी थी। इसके बाद आईटीआई लिमिटेड ने यह काम भुवनेश्वर स्थित सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (एसटीपीएल) को सौंप दिया था।
ईडी का आरोप है कि एसटीपीएल के निदेशक सुरेश चंद्र नायक ने आईटीआई लिमिटेड से लिखित अनुमति लिए बिना उम्मीदवारों की संवेदनशील जानकारी संभालने के लिए पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज को काम सौंपा था।
एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि सिलिकॉन टेकलैब और शंकर प्रस्ती से जुड़े लोगों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया और पैसे के बदले परीक्षा के प्रश्नपत्र से संबंधित गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराने का लालच दिया।
ईडी के मुताबिक, PSIL इंटरनेशनल लिमिटेड ने आईटीआई लिमिटेड को इसकी जानकारी दिए बिना एसटीपीएल में नियंत्रक हिस्सेदारी और बहुमत शेयरधारिता हासिल कर ली थी।
एजेंसी का दावा है कि इसके बावजूद नायक एसटीपीएल के निदेशक बने रहे और उन्होंने अनधिकृत तरीके से परीक्षा के प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई।
धन शोधन का यह मामला ओडिशा पुलिस की उस एफआईआर से जुड़ा है, जो सितंबर 2025 में दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई आंध्र प्रदेश में ओडिशा सीमा के पास इचापुरम के निकट तीन बसों को रोके जाने के बाद हुई थी। इन बसों में 114 उम्मीदवार सवार थे।
अधिकारियों के अनुसार, उम्मीदवारों को कथित तौर पर 15 लाख से 30 लाख रुपये तक नकद भुगतान के बदले लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था।
यह परीक्षा 5 और 6 अक्टूबर 2025 को आयोजित होनी थी।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी इस मामले की जांच की थी। ईडी के अनुसार, सीबीआई ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर बताया था कि परीक्षा प्रक्रिया में मार्च 2025 के दौरान कई अनियमितताएं हुई थीं। उस समय परीक्षा पहली बार आयोजित की जानी थी।
एजेंसी ने बताया कि अनियमितताओं का पता चलने के बाद ओपीआरबी ने परीक्षा रद्द कर दी थी।