ओडिशा के अगले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। राज्य सरकार द्वारा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजे गए आईपीएस अधिकारियों के पैनल को चुनौती देते हुए जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने पर सहमति जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ओडिशा सरकार डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों को दरकिनार करने का प्रयास कर रही है।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. चिदंबरम ने दलील दी है कि राज्य सरकार ने पहले यूपीएससी को अधिकारियों का एक पैनल भेजा था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इसके बाद भेजे गए नए पैनल में डीजीपी रैंक के तीन अधिकारी और एडीजीपी रैंक के आठ अधिकारी शामिल थे। चिदंबरम ने अदालत को बताया कि यूपीएससी ने 7 अगस्त को स्पष्ट किया था कि वह केवल डीजीपी स्तर के अधिकारियों पर विचार करेगा।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि एक एडीजीपी को डीजीपी रैंक पर पदोन्नत किया जा रहा है, ताकि उन्हें नए पैनल में शामिल किया जा सके। याचिकाकर्ता के मुताबिक, ऐसा करना 2006 के प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों का उल्लंघन होगा।
दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि UPSC पात्रता मानदंड और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से भली-भांति अवगत है। सीजेआई ने कहा कि हमें उम्मीद है कि UPSC हमारे फैसले का पालन करेगा।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि कथित तौर पर अपात्र अधिकारियों का पैनल भेजा जाता है, तो UPSC को सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए।