भुवनेश्वर-कटक कमिश्नरेट पुलिस ने अपने साइबर रक्षक अभियान के तहत लोगों को साइबर स्टॉकिंग के प्रति जागरुक करने के लिए एक जनजागरुकता अभियान शुरू किया है। पुलिस ने लोगों को याद दिलाया कि किसी का पीछा करना या ऑनलाइन निगरानी करना कानूनन अपराध है, इसे ध्यान या प्रेम का प्रदर्शन नहीं माना जा सकता। इस संबंध में पुलिस ने विशेष रूप से साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 (टोल-फ्री) और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल www.cybercrime.gov.in के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।
पुलिस की एडवाइजरी में कहा गया है कि बिना सहमति किसी व्यक्ति की निजता और व्यक्तिगत दायरे का उल्लंघन करना साइबर स्टॉकिंग की श्रेणी में आता है। इससे पीड़ित व्यक्ति में डर, चिंता, मानसिक उत्पीड़न और भावनात्मक आघात जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। पुलिस ने इसे तकनीक के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताते हुए कहा कि कानून में इसके लिए कड़े दंड का प्रावधान है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66E के तहत निजता के उल्लंघन के मामले में तीन साल तक की जेल या 2 लाख रुपये तक का जुर्माना, अथवा दोनों का प्रावधान है।
वहीं, धारा 67 के तहत अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर पहली बार दोषी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दोबारा अपराध करने पर सजा बढ़कर पांच साल तक और जुर्माना 10 लाख रुपये तक हो सकता है।
यौन रूप से स्पष्ट सामग्री और बच्चों के यौन शोषण से संबंधित सामग्री के मामलों में और भी कड़े प्रावधान हैं, जिनके तहत सात साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
पुलिस ने नागरिकों से दूसरों की निजता का सम्मान करने, ऑनलाइन जिम्मेदारी से व्यवहार करने और साइबर स्टॉकिंग या इससे जुड़े किसी भी अपराध की जानकारी मिलने पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।