झारखंड के मतदाताओं के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) के. रविकुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि एसआईआर के सामान्य मामलों में अब किसी भी मतदाता को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए कार्यालय नहीं बुलाया जाएगा। हाल ही में 63 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी होने के बाद, आयोग ने यह अहम फैसला लिया है। अब अनमैप्ड या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले मामलों में बीएलओ खुद आपके घर आएंगे, जरूरी दस्तावेज लेंगे और उन्हें 'ईसीआईनेट' पोर्टल पर अपलोड करेंगे। जिन बीएलओ को तकनीक में परेशानी है, उनकी मदद के लिए जिला स्तर पर वॉलेंटियर्स और सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। इससे हमारे बुजुर्गों, श्रमिकों, गरीबों और बेघरों को दफ्तरों के चक्कर काटने से बड़ी राहत मिलेगी। सीईओ ने साफ निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया पूरी तरह मतदाता की सुविधा को ध्यान में रखकर चलाई जाएगी। केवल बहुत ही असाधारण या विशेष परिस्थितियों में ही, ईआरओ के निर्देश पर ऑनलाइन सुनवाई होगी।
खास बात यह है कि जरूरत पड़ने पर मतदाता अपनी जगह परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को इस ऑनलाइन सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकता है। इसके साथ ही, यदि कोई मतदाता पहले से तय किसी स्थल पर सुनवाई के लिए पहुंचता है, तो संबंधित अधिकारियों को वहां अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है। सुनवाई के बाद अधिकारियों को यह स्पष्ट करते हुए 'स्पीकिंग ऑर्डर' पास करना होगा कि व्यक्ति भारत का नागरिक है, एक अक्टूबर 2026 को उसकी उम्र 18 वर्ष पूरी हो चुकी है या नहीं, और वह उस क्षेत्र में सामान्य रूप से निवास करता है या नहीं।
गरीबों, श्रमिकों और बेघरों के लिए रात्रि आश्रय स्थलों पर विशेष शिविर और हेल्प डेस्क लगाए जा रहे हैं। साथ ही, नाम जुड़वाने या सुधार के लिए दावा-आपत्ति दाखिल करने की अंतिम तिथि सिर्फ 30 सितंबर 2026 यानी परसों तक है, जबकि मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 19 अक्टूबर को किया जाएगा।