पार्क सर्कस स्टेशन परिसर में देर रात बुलडोजर एक्शन देखने को मिला। रेलवे की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। पूर्व रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान रेलवे भूमि को खाली कराने के लिए चलाया गया। हालांकि इस मामले पर प्रशासन के अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
बता दें, सियालदह रेल डिविजन के सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक पार्क सर्कस है। यहां हर दिन बड़ी संख्या में दैनिक यात्री आवाजाही करते हैं। आरोप है कि स्टेशन परिसर के अंदर और बाहर रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जा कर बड़ी संख्या में दुकानें बना दी गयी थी।
इतना ही नहीं, कई स्थानों पर स्थायी स्टॉल भी बना लिए गए थे। इस बारे में पिछले लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। नित्य यात्रियों में भी नाराजगी देखी जा रही थी। आखिरकार राज्य में सत्ता परिवर्तित होने के बाद जब रेलवे की जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करवाने का काम शुरू हुआ, तब पार्क सर्कस स्टेशन पर भी कार्रवाई की गयी।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसी महीने की शुरुआत में पार्क सर्कस रेलवे स्टेशन परिसर में दुकान और स्टॉल चलाने वाले व्यापारियों को भी नोटिस जारी किया गया था। उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर जगह खाली करने का निर्देश दिया गया था।
हालांकि आरोप है कि नोटिस मिलने के बाद भी किसी ने अपने स्टॉल या दुकान नहीं हटाई, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की।
बताया जाता है कि शनिवार (27 जून) की रात को करीब 10.30 बजे पार्क सर्कस रेलवे स्टेशन परिसर और आसपास के पूरे इलाके को पुलिस तथा रेलवे सुरक्षा बल ने घेर लिया। इलाके में बैरिकेडिंग भी कर दी गई। सबसे पहले लाउडस्पीकर के जरिए रेलवे की जमीन खाली करने की घोषणा की गई और दुकानदारों को कुछ समय भी दिया गया।
आरोप है कि स्टेशन परिसर के किसी भी दुकानदार ने स्वेच्छा से अपनी दुकान या स्टॉल नहीं हटाया। इसके बाद बुलडोजर अभियान शुरू किया गया और एक-एक कर कथित तौर पर अवैध दुकानों, स्टॉलों और गुमटियों को ध्वस्त कर दिया गया।
इस दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। पूरे अभियान के दौरान लगातार लाउडस्पीकर से घोषणा की जा रही थी। लाउड स्पीकर से स्पष्ट चेतावनी दी जा रही थी कि 'प्रशासनिक कार्रवाई में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।'
बताया जाता है कि पूरा अभियान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इस कार्रवाई को देखने के लिए आसपास के घरों की खिड़कियों और छतों पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसके बावजूद कहीं भी किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। करीब ढाई घंटे तक चले बुलडोजर एक्शन के बाद पूरे इलाके को खाली कराकर अतिक्रमणमुक्त करवा दिया गया।