ओडिशा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मई से पारादीप के तट के पास फंसे विदेशी तेल टैंकर एमटी यूनिटी के चालक दल को जहाज से उतारकर उन्हें उनके-अपने देशों में वापस भेजने की व्यवस्था की जाए। अदालत ने यह प्रक्रिया प्राथमिकता के आधार पर तीन सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा है।
न्यायमूर्ति आरके पटनायक ने छह अक्टूबर को जहाज के मास्टर और रूसी नागरिक इस्त्यागिन एवगेनी निकोलायेविच की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि मर्चेंट शिपिंग एक्ट के तहत जहाज के मालिक ने चालक दल को उनके हाल पर छोड़ दिया है। मालिक की ओर से वेतन का भुगतान नहीं करने, आवश्यक सामान उपलब्ध नहीं कराने तथा चालक दल को बदलने और उन्हें स्वदेश भेजने की व्यवस्था नहीं करने के कारण यह स्थिति पैदा हुई।
हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को चालक दल के सदस्यों को जहाज से उतारने, उन्हें उनके देश वापस भेजने और जहाज पर नए चालक दल की तैनाती के लिए आवश्यक व्यवस्था करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया में होने वाले खर्च की वसूली जहाज के मालिक या अन्य जिम्मेदार पक्षों से की जा सकती है।
कैमरून के झंडे वाला यह तेल टैंकर 11 मई से पारादीप बंदरगाह के पास लंगर डाले हुए है। जहाज के मालिक के खिलाफ व्यावसायिक दावों को लेकर हाईकोर्ट में दायर तीन एडमिरल्टी मुकदमों के तहत यह अब भी जब्ती की स्थिति में है। यह जहाज रूसी कच्चा तेल उतारने के लिए आया था।
जहाज के मास्टर सहित चालक दल के 23 सदस्य अब तक टैंकर पर ही मौजूद हैं। कोलकाता स्थित रूसी महावाणिज्य दूतावास के अनुसार, चालक दल में 20 रूसी नागरिक, दो मिस्र के नागरिक और एक कजाकिस्तान का नागरिक शामिल है।
अपनी याचिका में जहाज के मास्टर ने बताया कि चालक दल को मई से वेतन नहीं मिला है। साथ ही, भोजन, पीने के पानी और अन्य जरूरी सामान का भंडार भी धीरे-धीरे खत्म हो रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि जहाज के मालिक और स्थानीय एजेंट ने इस समस्या के समाधान के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।
याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद जहाजों पर काम करने वाले विदेशी नाविकों को भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है।
बाद में जहाज के बीमाकर्ता ने आवश्यक खाद्य सामग्री और अन्य सामान उपलब्ध कराया तथा बकाया वेतन का भुगतान भी कर दिया।
इस रिट याचिका पर पहली बार अगस्त में सुनवाई हुई थी। उस दौरान हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए थे। अंतरिम राहत के तौर पर अदालत ने पारादीप पोर्ट अथॉरिटी को जहाज में जमा स्लज (कीचड़नुमा अपशिष्ट) को तत्काल हटाने का निर्देश भी दिया था।
सितंबर में विदेश मंत्रालय ने अदालत को बताया था कि चालक दल के कल्याण और उन्हें स्वदेश वापस भेजने के मुद्दे पर रूसी दूतावास के साथ नियमित संपर्क बनाए रखा जा रहा है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि तेल टैंकर अब भी जब्ती के अधीन है।