बेटे से दुखी मां-बाप पहुंचे हाईकोर्ट

  • Feb 19, 2026
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कोलकाता,19 फरवरीः

बेटा उनका ध्यान नहीं रखता। उल्टा, वह अलग-अलग तरीकों से उनकी बेइज्जती करता है। परेशान पिता फिर बेटे के खिलाफ मामला दायर करते हैं। मजबूर पिता बेटे के खिलाफ अपनी शिकायतें गिनवाने लगते है। उनके पास खड़ी पत्नी बीच-बीच में अपने पति को याद दिलाती रहती है, कि वह कोर्ट को बताये कि किस-किस तरीके से बेटे ने परेशान कर रखा है। वकील होने के बावजूद, बेटा सुनवाई में वर्चुअली मौजूद होता है। उसकी मां करीब 19 साल पहले कोलकाता के एक जाने-माने गर्ल्स कॉलेज के डिपार्टमेंट की हेड की नौकरी से रिटायर हुई थीं। उसके पिता कलकत्ता यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के हेड के पद से रिटायर हुए थे, जिनकी उम्र अब 82 साल है। बेटा हाई कोर्ट में सीनियर सिटिजन मेंटेनेंस एक्ट के तहत अपने माता-पिता को पैसे देने के संबंधित अधिकारियों के आदेश को चुनौती देने आया है। उसका कहना है कि उसे मुआवजा देने में कोई आपत्ति नहीं है। लेकिन निचली अदालत ने उसे लिखकर बयान देने का मौका दिए बिना ही फैसला सुना दिया। पुरानी सारी नाराजगी भुलाकर वह अब भी अपने माता-पिता को पैसे देगा। हालांकि उससे पहले वह चाहता है कि उसके माता-पिता इस केस को खत्म करें और उसे परेशान करना बंद कर दें। माता-पिता उल्टा तर्क देते हैं कि बेटा अपनी पत्नी के कहने पर उन्हें आए दिन परेशान करता रहता है। बेटे ने अपने पिता के साथ फोन पर हुई बातचीत को रिकॉर्ड करके उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इस उम्र में बूढ़ी मां कैंसर से पीड़ित पति का इलाज कराने के लिए भटकती रहती हैं। उनका आरोप है कि बेटा उनका ख्याल नहीं रखता। पहले कोलकाता के एक जाने-माने स्कूल, फिर IIT-खड़गपुर और आखिर में IIM अहमदाबाद से पढ़ाई करने वाला बेटा एक मल्टीनेशनल इकोनॉमिक ऑर्गनाइजेशन में ऊंचे पद पर है। वह अभी मुंबई में रहता है। हालांकि कोर्ट में उसका वकील है, लेकिन उसने ऑनलाइन बताया कि उसकी मां का लंबे समय से मेंटल इलाज चल रहा है। वह बचपन से ही उन्हें बहुत अनुशासित रखा करती थीं। बेटे ने कहा कि उसे पैसे नहीं देती थीं। बाद में, जब वह बडा हुआ और उसे नौकरी मिल गई, तब उसके माता-पिता हमेशा इस कोशिश में रहते थे कि वह शादी न करे।

 बेटे का आरोप है कि माता-पिता उसे अपने नियंत्रण में रखना चाहते थे। जब से उसने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी की है, तब से उसके माता-पिता हर किसी से उसकी पत्नी की बुराई करते रहते हैं। बेटे की बात सुनकर मां ने रोते हुए पूछा, "मैं अपनी सैलरी का सारा पैसा अपने बेटे की पढ़ाई पर खर्च करती थी। कोलकाता के नामी गिरामी स्कूल में पढ़ाने के बाद अच्छी शिक्षा देने के लिए उसे IIT और IIM भेजा। जिस मां ने बेटे की पढ़ाई के लिए इतना कुछ किया, अब उसी मां का दिमागी संतुलन बिगड़ गया है? हमें और कुछ नहीं चाहिए, बस अच्छा व्यवहार चाहिए। बेटा बेशक, अपनी मां के दिमागी इलाज की बात पर अड़ा रहा। दंपति का मुख्य आरोप यह रहा कि बेटे ने कभी उनका ध्यान नहीं दिया। यह सब वह अपनी पत्नी के लिए कर रहा था।

  बुजुर्ग दंपति ने बहू पर भी आरोप लगाया। काफी देर तक दलीलें सुनने के बाद, जस्टिस कृष्ण राव ने बेटे का दिया गया हलफनामा देखने के बाद कहा कि जैसे माता-पिता बुरे बेटे को अस्वीकार नहीं कर सकते, ठीक उसी तरह एक बेटा अपने माता-पिता के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकता, जो अभिभावकों से नहीं कही जा सकती। इसलिए, कोर्ट बेटे को सलाह देता है कि वह किसी के खिलाफ कुछ भी कहने या लिखने से पहले इंसानियत दिखाए। इसके बाद कोर्ट ने राज्य, राज्य के हेल्थ डिपार्टमेंट और फैमिली वेलफेयर डिपार्टमेंट को 10 मार्च तक एक साइकोलॉजिस्ट, एक साइकियाट्रिस्ट और एक काउंसलर का नाम कोर्ट को देने का निर्देश दिया। कोर्ट उनके साथ एक कमेटी बनाएगा। बुज़ुर्ग दंपति और उनके बेटे को आने वाले दिनों में उस कमेटी के सामने पेश होना होगा।

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