ओडिशा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को प्रस्तावित कोणार्क बालुखंड वन्यजीव अभयारण्य से जुड़े अपने पूर्व निर्देशों का कथित रूप से पालन न करने पर पुरी जिला कलेक्टर को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट की एक खंडपीठ ने कलेक्टर से यह स्पष्ट करने को कहा है कि अदालत के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई न करने पर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए। कलेक्टर को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
यह अवमानना नोटिस प्रस्तावित अभयारण्य के क्रियान्वयन में लंबे समय से हो रही निष्क्रियता के कारण जारी किया गया है, जबकि इसके लिए वर्ष 1987 में ही अधिसूचना जारी कर दी गई थी। लगभग चार दशक बीत जाने के बावजूद अभयारण्य के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। प्रभावित भू-स्वामियों को न तो मुआवजा मिला है और न ही भूमि को औपचारिक रूप से अधिग्रहित, मुक्त या वापस किया गया है।
भूमि मालिकों को लंबे समय से झेलनी पड़ रही अनिश्चितता को देखते हुए हाईकोर्ट ने पहले राज्य अधिकारियों को कोणार्क बालुखंड अभयारण्य के संबंध में अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया था। दिसंबर 2024 में अदालत ने समय-सीमा बढ़ाते हुए मामले को निपटाने की अंतिम तारीख तय की थी।
हालांकि, इन निर्देशों का कथित पालन न होने के चलते अदालत ने अब अवमानना कार्यवाही शुरू की है। यह मामला लंबे समय से लंबित भूमि और संरक्षण से जुड़े मुद्दों को सुलझाने में प्रशासनिक देरी को उजागर करता है, जिससे पर्यावरणीय उद्देश्यों के साथ-साथ भूमि मालिकों के अधिकार भी अधर में लटके हुए हैं।