अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रेत कलाकार और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने एक बार फिर ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को अपनी कला के माध्यम से जीवंत किया है। उन्होंने पश्चिमी ओडिशा के प्रमुख कृषि पर्व नुआखाई को समर्पित एक खूबसूरत रेत कलाकृति तैयार की है।पुरी समुद्र तट की सुनहरी रेत पर बनाई गई इस कलाकृति में पारंपरिक संबलपुरी परिधान पहने एक महिला को प्रार्थना करते हुए दर्शाया गया है। इसके साथ ही फूलों की आकृतियों से सजी मां समलेश्वरी की आकर्षक लाल गोलाकार प्रतिमा और ताजा कटे धान की सुनहरी बालियों को भी कलाकृति में उकेरा गया है।
इस रेत कलाकृति पर ‘नुआखाई जुहार’ लिखा गया है और इसके पीछे बंगाल की खाड़ी का मनमोहक दृश्य दिखाई दे रहा है।
नुआखाई कृतज्ञता का पर्व है, जो नई फसल के स्वागत और उसके प्रति आभार प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। पश्चिमी ओडिशा के लोग नई फसल से प्राप्त चावल (नवान्न) देवी को अर्पित कर समृद्धि और सुख-शांति के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं।
सुदर्शन पटनायक अपनी सैंड आर्ट के जरिए लगातार ओडिशा के त्योहारों और सांस्कृतिक परंपराओं को दुनिया के सामने पेश करते रहे हैं। उनकी यह कलाकृति सांस्कृतिक गौरव, उम्मीद और समृद्धि का संदेश देती है। इस शानदार रेत कलाकृति को राज्यभर के कला प्रेमियों और नुआखाई मनाने वाले लोगों से खूब सराहना मिल रही है।